Shamsher Ali – शमशेर अली

मैं? इस विश्व के जीवन मंच पर अदना सा किरदार हूँ जो अपनी भूमिका न्यायपूर्वक और मन लगाकर निभाने का प्रयत्न कर रहा है।

कुछ मेरे बारे में….!

कुछ मेरे बारे में!

मैं?

इस विश्व के जीवन मंच पर अदना सा किरदार हूँ जो अपनी भूमिका न्यायपूर्वक

और मन लगाकर निभाने का प्रयत्न कर रहा है। पढ़ाई लिखाई के हिसाब से विज्ञान

के इंफोर्मेशन टेक्नॉलोजी में स्नातक हूँ और पेशे से सॉफ़्टवेयर इंजीनियर

(software engineer) हूँ तथा मेरी कंपनी में मेरा पद मुझे लीड सॉफ़्टवेयर

इंजीनियर (Lead Software Engineer) बताता है। पढ़ाई तो कंप्यूटर पर इंस्टॉल

होने और चलने वाले सॉफ़्टवेयरों को बनाने की करी, लेकिन जब से इंटरनेट को

देखा और याहू ईमेल को प्रयोग करा तो मन में उत्सुक्ता हुई कि यह कैसे कार्य करता

है, बिना इंस्टॉल हुए बिना कंप्यूटर पर लोड हुए, और तभी से इंटरनेट के ज़रिए

ब्राऊज़र में उपलब्ध हो सकने वाले सॉफ़्टवेयरों में मन रम गया और स्वयं इनके बारे में पढ़ इसी

दिशा में अपने करियर की गाड़ी को मोड़ दिया।

ब्लॉगों/चिट्ठों से मेरा परिचय सन्‌ 2002 के मध्य में तब हुआ था जब एक तकनीकी

मासिक मत्रिका में मैंने ब्लॉग के बारे में पढ़ा था और यह जाना था कि ब्लॉग

क्या होता है। शौक-शौक में मैंने भी अपना ब्लॉग बना डाला, टेस्ट पोस्ट के अतिरिक्त उस पर

थोड़े समय तक हल्की फुल्की पोस्ट करता रहा। लेकिन यह महंगा शौक था क्योंकि

उस समय मुझे कंप्यूटर और इंटरनेट सिर्फ़ साइबर कैफ़े में या स्कूल के पुस्तकालय

में ही उपलब्ध थे और मेरी टंकण गति बहुत कम थी। इसलिए वर्ष के अंत तक

आते-आते मैंने अपने ब्लॉग को तिलांजिली दे डाली, लेकिन ब्लॉग पढ़ना नहीं छोड़ा।

उस समय अधिकतर ब्लॉगर  अपनी दिनचर्या संबन्धित मसौदा

अपने ब्लॉग पर लिखते थे जैसे उन्होंने दिन में क्या खाया, कहाँ गए, क्या किया

आदि, लेकिन कुछेक अच्छे ब्लॉगर थे जो अन्य विषयों पर भी लिखते थे तो इनके

ब्लॉग पते मैंने एक पर्ची पर लिख के रख लिए और जब भी इंटरनेट मुहैया होता

तब इन 2-3 ब्लॉगों को भी देख डालता था।

सिर्फ़ ब्लॉग पढ़ने का यह चलन सन् 2006 तक चलता रहा। उस वर्ष मार्च में मुझे

लगा कि मेरा अपना ब्लॉग भी होना चाहिए अब, लेकिन मन किसी फ्री के होस्ट पर

डालने का नहीं था, ब्लॉगर  3-5 साल पहले दौड़ लगा के अब सो चुका था,

मूवेबल टाइप (movable type) बहुत हॉट (hot) चीज़ थी और वर्डप्रैस भी उभर के

आ रहा था। पर्ल (एक प्रोग्रामिंग भाषा ) से तो मेरा तब से बैर था जब से कॉलेज के तीसरे सिमेस्टर में

आमना सामना हुआ था, लेकिन फिर भी मूवेबल टाइप के रुआब की खातिर उसको

अपने कंप्यूटर पर इंस्टॉल कर मूवेबल टाइप की टैस्टिंग की, लेकिन वो इंस्टॉल हो

कर नहीं दिया। उसके बाद वर्डप्रैस की ओर आस लगाई लेकिन उसने भी नखरे

दिखाए। खीज कर बोस्ट-मशीन नाम के देशी सॉफ़्टवेयर को पकड़ा, मामूली सा

बिना टशन वाला सॉफ़्टवेयर था, थोड़ा नाज़ नखरा दिखा चल गया तो 1 अप्रैल

2004(जिस दिन जीमेल लाँच हुई थी) को बारह बजते ही मैंने ब्लॉग लेखन की

दुनिया में पुनः कदम रखा!  इधर मैं उस सॉफ़्टवेयर से संतुष्ट नहीं था,

वर्डप्रैस पर नज़र थी, मन में निश्चय किया कि इसको इंस्टॉल करके ही मानूँगा,

दिक्कतें आई लेकिन आखिरकार लगभग एक सप्ताह बाद मैंने वर्डप्रैस पर

स्थानांतरण कर ही लिया। लेकिन उस ब्लॉग पर मेरा तकनीकी लेखन करने का ही

इरादा था और समय के साथ-साथ यह एक निश्चित दिशा पकड़ता गया।

अपना ब्लॉग आरंभ करने के एक वर्ष बाद 8 अप्रैल 2007 को एक तकनिकी वेब ब्लॉग,

जोशफैक्ट्री (JoshFactory), की स्थापना की। शुरुआती दौर में यह ब्लॉग मेरे डोमेन

के एक भाग में ही अपना ठीया बनाए हुए था।

हमारी पहली उपलब्धी आई जब इसका ट्रैफ़िक इतना बढ़ गया कि यह मेरे डोमेन के

होस्टिंग पर समाए नहीं समा रहा था, तो इसका अपना डोमेन लेकर इसको अलग से

होस्ट किया। दूसरी बड़ी उपलब्धी तब आई जब अक्तूबर 2014 में गूगल के सर्च इंजन में

अपने ब्लॉग की रैंकिंग टॉप पर पहुँच गई।

नवंबर 2008 में मैंने पहले से रजिस्टर कराए हुए शमशेर अली ब्लॉग पर अपना पहला

हिन्दी ब्लॉग आरंभ किया। शीघ्र ही पता चला कि पहले से बहुत से लोग हिन्दी ब्लॉग

जगत में खूंटा गाड़े बैठे हैं, अकेला मैं ही फन्ने खां नहीं हूँ!!  धीरे-धीरे हिन्दी ब्लॉगरों

से परिचय बढ़ा, किसी से प्रेम-आदर का आदान प्रदान हुआ तो किसी से पहले झगड़े

और बाद में मित्र बने। अक्षरग्राम जैसे सशक्त मंच और नारद के बारे में जानकारी

मिली। अक्षरग्राम को मुझ में पता नहीं क्या दिखा( कि मुझको अक्षरग्राम से

तकनीकी रूप से जोड़ लिया, अक्षरग्राम तकनीकी टीम की

स्थापना हुई(अक्षरग्राम की सभी वेबसाइटों का खांसी-ज़ुकाम देखने के लिए मतलब बग्स ढूंढने के लिए)

तो उसमें वाइल्ड कार्ड एन्ट्री मिली। प्रयोग के तौर पर आरंभ हुआ यह हिन्दी ब्लॉग मेरे लिए

प्रयोग से कुछ अधिक ही बन गया, यहाँ मैं खुल कर अपने गैर-तकनीकी विचार पहली

बार प्रकट कर पाया और अपनी भाषा में लिख आज़ादी का एक अनूठा एहसास

महसूस हुआ। इधर मार्च 2014 में सॉफ्टवेर डेवेलोप करना सुरु  करी और

कुछ ही दिन बाद अपनी पहली सॉफ्टवेयर भी रच डाली। इस सॉफ्टवेर पर अधिक तो

कुछ कार्य नहीं हुआ पर जितना हुआ उसमें मज़ा आया।

समय बीता, आवश्यकता महसूस हुई और अपने ब्लॉग लेखन में वापसी के कई वर्ष

बाद सितम्बर 2015 में मोबाइल और गैजेट्स के लिए मोबाइलज्ञान (MobileGyaan) खोल डाला।

इससे काफ़ी आशाएँ हैं और उम्मीद है कि यह आगे जाएगा। 

मेरे बारे में अन्य जानकारी और मेरी वेबसाइट्स, सॉफ्टवेयर्स तथा ब्लॉगों की सूचि के लिए

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