है। एक सच्चा दोस्त हमारी जिंदगी को
नई राह दे सकता है। लेकिन अक्सर हम
लोग छोटी – छोटी गलतियों या भूलों की
वजह से अपना बेशकीमती दोस्त खो देते हैं।
आज फ्रेंडशिप डे के मौके पर हम आपको बता रहे हैं ऐसी ही चंद भूलों के बारे में , जिनसे आपको बचना
चाहिए। पूरी जानकारी शमशेर अली से…किसी के भी हाथ में एक बेल्ट बांध दिया और हो गई दोस्ती पक्की, बन गए फ्रेंड्स। पर वास्तव में यह एक झूठ है जो कुछेक पल के लिए अपने दिल को तसल्ली तो दे सकता है लेकिन वास्तव में आपको उस गहरी दोस्ती का अहसास नहीं कराता।
दोस्ती से मतलब यह कहीं नहीं निकलता कि सालों पहले की गई दोस्ती ही फ्रेंडशिप कहलाती है। ऐसा नहीं है दोस्ती वह हो जो चाहे एक दिन पहले, एक साल पहले या कई वर्षों पहले की हो। दोस्ती वह जिसमें आप अपने दोस्तों के प्रति पूरी तरह समर्पित हो।
यह बात सिर्फ किसी भी सहायता के लिए नहीं है। लेकिन हर समय, हर सुख-दुख और हर पल दिल को उस इंसान का खयाल रहे, चाहे सुख हो दुख, हर पहलू में वह सामने वाले को एक ही नजर से देखें, उसमें परखने की, या फिर इस उम्मीद कि मैंने तो उसकी दुख में मदद की थी, लेकिन जब आज मैं दुख से गुजर रहा हूं तब वहीं दोस्त मेरे काम नहीं आया। ऐसी कोई भी भावना दोस्ती के आड़े नहीं आनी चाहिए।
दोस्ती करते और निभाते समय दिल में अहंकार, ईर्ष्या और बदले की भावना कभी भी लेकर दोस्त नहीं बनाने चाहिए। ऐसी दोस्ती बनाने पर आपके मन का अहंकार समय आने पर उस दोस्त से बदला लेने पर उतारू हो जाएगा। और जब मन अहंकार, ईर्ष्या तले जलने लगेगा तब दोस्ती दोस्ती न रखकर एक मजाक बन जाएगी।इसलिए हमेशा दोस्त बनाते समय अपने मन के आंगन से उस दोस्त के लिए अहंकार का त्याग कर क्षमा के रूप में आगे बढ़ते हुए दोस्ती का हाथ बढ़ाएं। तभी आपकी दोस्ती बनाने का किया गया प्रयत्न सफल होगा।
स्कूल-कॉलेज हो या ऑफिस लाइफ हो दोस्ती का यह रिश्ता ऐसा कभी भी ना बनाए जो जरा-सी भूल से आपकी दोस्ती के बीच दरार आ जाए।
दोस्ती का यह रिश्ता इतना गहरा हो कि चाहे उसमें लोग कमल खिलाएं या कांटे उगाएं… कहने का तात्पर्य यह है कि आज के जमाने में हर इंसान का दूसरे इंसान को देखने का नजरिया, अंदाज अलग-अलग होता है और ऐसे में आपके द्वारा की गई दोस्ती और वह भी एक मेल की फीमेल से की गई दोस्ती को दुनिया वाले किस अंदाज में लेंगे। यह बताना बहुत मुश्किल है।
ऐसे समय दोस्त बनाते समय आपका दोस्त सच्चाई का साथ देते हुए अपने दोस्ती के अटल वादे पर काम रहे। किसी भी रिश्ते को निभाने में विश्वास की मजबूत डोर ही उसे आखिरी अंजाम तक पहुंचाती है।
अत: दोस्त जरूर बनाएं, दोस्ती भी जरूर करें लेकिन उस रिश्ते को किसी भी तरह दरकने न दें।
हमेशा ऐसे दोस्त चुनें या बनाएं जो हर नजरिये से दोस्ती करने लायक हो।
दोस्ती में 10 भूलें
सुनना नहीं , सलाह देना
दोस्ती की नींव है बातचीत , लेकिन
ध्यान रखें कि इस बातचीत में जितना
जरूरी अपनी बात सामनेवाले को सुनाना
है , उससे ज्यादा जरूरी है उसकी बात
सुनना। दोस्त को बिना टोके अपनी बात
पूरी करने दें। खुद भी अपने बारे में जो भी
बताएं , पूरी ईमानदारी और खुलेपन के
साथ। साथ ही , लोग दोस्त की बात
सुनकर उसे सलाह देने लगते हैं। यह सही
नहीं है। अक्सर सामने वाला सिर्फ आपसे
बातें शेयर कर रहा होता है। वह आपसे
सलाह नहीं चाहता। इसलिए जब तक
आपका दोस्त आपसे सलाह न मांगे , आप
सलाह न दें। दोस्तों के बीच बहस भी खूब
होती है। पारिवारिक रिश्तों में हम
जिस तरह खुलकर बातें नहीं कर पाते ,
दोस्ती में वह छूट हमारे पास होती है ,
लेकिन यहां भी लिमिट ध्यान रखें और
आपसी बहस को हेल्दी डिबेट तक ही रखें।
अपनी बात को साबित करने के लिए दोस्त
को हर्ट करने की कोशिश न करें।
बदलने की कोशिश
हम किसी से दोस्ती अक्सर उसकी किसी
खासियत से इम्प्रेस होकर करते हैं। ऐसे में
हम सिर्फ उसकी पॉजिटिव चीजें देख रहे
होते हैं। लेकिन वक्त के साथ उसकी
खामियां भी नजर आने लगती हैं , बल्कि कई
बार हम उन्हीं पर फोकस करने लगते हैं।
जान लें कि दुनिया में कोई भी परफेक्ट
नहीं है। आप भी नहीं। फिर दूसरे से ऐसा
होने की उम्मीद क्यों ? हमें अपने दोस्त को
उसकी कमियों और कमजोरियों के साथ
स्वीकार करना चाहिए। साथ ही , उसकी
निंदा न करें। आलोचना तो अक्सर
परिवार वाले भी करते हैं। दोस्ती का तो
मतलब ही है कि जैसा है , उसे वैसे ही
स्वीकार करें और बदलने की कोशिश न करें।
अगर दोस्त की कोई बात पसंद नहीं आती
तो उस पर ध्यान लगाने की बजाय उसे
इग्नोर करें। इससे आपका मन भी शांत
रहेगा और रिश्ता भी कायम रहेगा। यहां
यह भी जरूरी है कि हम दोस्ती के साथ –
साथ दोस्त की भी कद्र करें।
सुख में साथ , दुख में दूर
दोस्ती का मतलब लोग मौज – मस्ती ,
पार्टी , सेलिब्रेशन ही समझते हैं। यह
गलत है। अगर आप सच्चे दोस्त हैं तो अपने
दोस्त की खुशी में शरीक न भी हो पाएं ,
लेकिन उसके गम का हिस्सा जरूर बनेंगे।
अगर वह तकलीफ में है और आपसे कुछ शेयर
करता है तो आप उसे महसूस करें। सिर्फ
हमदर्दी के कुछ बोल बोलकर अपना काम
खत्म न समझें , उसकी मदद करें। कहा भी
जाता है कि असली दोस्ती की परख
मुसीबत में ही होती है। अगर वह आपसे कुछ
शेयर नहीं करना चाहता तो पूछने की
कोशिश जरूर करें ताकि उसका मन हल्का
हो सके लेकिन कुरेद – कुरेद कर कभी न पूछें।
लेकिन अगर आपको लगता है कि आपका
दोस्त किसी गलत राह पर जा रहा है तो
उसे समझा – बुझाकर उधर जाने से जरूर
रोकें। आमतौर पर लोग दोस्तों की बातें
सुनते और मानते हैं। यह न सोचें कि इससे
दोस्ती खतरे में पड़ जाएगी। समझ आने पर
आपका दोस्त आपके और करीब आ जाएगा।
बांध कर रखना
अपने दोस्त को कभी भी बांधने की कोशिश
न करें। यह न सोचें कि वह हमेशा सिर्फ
मेरा ही दोस्त बना रहेगा। अपने दोस्त
की लिमिटेशन को समझें और उम्मीदों को
सच की कसौटी पर आंकें। मानें कि उसका
भी परिवार है , दूसरे दोस्त हैं , ऑफिस है ,
उन तमाम चीजों के लिए उसे वक्त चाहिए।
यह सोचने की बजाय कि वह आपसे मिला
नहीं , सोचें कि हो सकता है कि वह वाकई
बिजी हो। दोस्ती में सामनेवाले को स्पेस
देना बहुत जरूरी है। रिश्ते में एक सेफ
फासला देना चाहिए। अगर आप दोस्त को
वक्त – बेवक्त डिस्टर्ब करते रहेंगे तो यह
आपकी दोस्ती को डिस्टर्ब कर सकता है।
अपनी दोस्ती की तुलना अपने या दोस्त के
बाकी दोस्तों से न करें। दोस्त और उसके
दोस्तों से किसी भी चीज को लेकर जलन न
करें। अगर मन में कोई बात आती है तो उसे
दिल खोलकर दोस्त के साथ शेयर कर लें ,
पर उसे ऐसा न लगे कि आपकी निगाह
उसकी किसी चीज पर है।
भावनाएं न जताना
किसी भी रिश्ते में इजहार बहुत जरूरी है।
दोस्ती पर भी यह बात लागू होती है।
इसका मतलब यह नहीं कि आप हर वक्त
सामनेवाले को जताते रहें कि आप उसकी
कितनी कद करते हैं लेकिन बीच – बीच में ,
खासकर उसकी जिंदगी के खास मौकों
मसलन जन्मदिन , शादी की सालगिरह
आदि पर ऐसा करने का मौका न चूकें। इन
मौकों के अलावा बीच – बीच में भी दोस्तों
को कोई सरप्राइज देना चाहिए। उसे
अच्छा लगेगा। इसी तरह अगर दोस्त से
कोई वादा किया है , तो उसे जरूर पूरा
करें। यहां यह ध्यान रखना भी जरूरी है
कि इमोशनल डिस्प्ले जरूरत से ज्यादा न
हो। दोस्त से अपनी बातें ईमानदारी से
शेयर करना जरूरी है , लेकिन ध्यान रखें कि
आप हमेशा अपनी परेशानियों और तकलीफों
का रोना ही न रोते रहें। भावनाओं का
इजहार करते वक्त भी बैलेंस्ड होना जरूरी
है।
अपनी मर्जी चलाना
अक्सर हम दोस्त की पसंद – नापसंद को
नजरअंदाज कर देते हैं। दोस्तों के बीच
कॉमन इंट्रेस्ट शेयर करना बहुत जरूरी है।
ध्यान रखें कि दोस्त के साथ छुट्टियां या
फिल्म आदि प्लान करते वक्त उसकी पसंद –
नापसंद का भी ध्यान रखें। उससे पूछें कि
उसे क्या पसंद है और क्या नापसंद। कभी
उसकी पसंद की जगह पर जाएं , कभी आपकी
पसंद पर। बातचीत में भी सामनेवाली की
पसंद के ठीक उलट टॉपिक पर बार – बार
चर्चा से बचें , वरना आपका साथ उसके लिए
बोरिंग साबित होगा। दोस्ती में पैसा
भी काफी मायने रखता है। अक्सर एक ही
हैसियत के लोगों में दोस्ती होती है।
हालांकि इसके अपवाद भी मिलते हैं ,
लेकिन पैसे को लेकर नजरिया जरूर मायने
रखता है। ध्यान रखें कि ऐसा न हो कि
कोई एक ही खर्च करता रहे और दूसरा
चुपचाप बैठा रहे।
मतभेद को मनभेद बनाना
कॉमन फ्रेंड्स में या किसी से भी अपने
दोस्त की बुराई न करें। आमतौर पर लोग
दूसरे से कोई बात शेयर करते हुए कहते हैं कि
किसी से न कहना लेकिन वे भूल जाते हैं कि
सामनेवाला भी इस बात को दूसरे से शेयर
करते हुए यही करेगा। इस तरह एक की
कही बात पूरे सर्कल में फैल जाती है।
कॉमन दोस्तों के बीच कही कोई बात
अक्सर दोस्ती के लिए दरार साबित
होती है। दोस्त को लेकर कोई गलतफहमी
हो गई है , तो उसे गांठ न बनाएं। उस मसले
पर डिस्कस करके हल कर लें। अपनी बात
कहने के साथ – साथ दूसरे को भी अपनी
बात कहने का मौका दें। आपसी दिक्कत को
हल करने के लिए किसी तीसरे की मदद न
लें। खुद ही हल निकालें। किसी भी रिश्ते
में ट्रांसपैरंसी बहुत जरूरी है। इसी तरह ,
दोस्त की कोई बात बुरी लगी तो उसे
माफ करना सीखें।
फैमिली से न घुलना
शादी के बाद कई बार अच्छे दोस्तों की
दोस्ती भी खत्म हो जाती है। इससे
निपटने के लिए दो चीजें जरूरी हैं। सबसे
पहले आप अपने दोस्त को छूट दें कि वह
अपनी नई लाइफ में थोड़ा बिजी हो
सकता है। उसकी जिम्मेदारियां बढ़ गई
हैं। नए रिश्तों में एडजस्टमेंट के लिए वक्त
की जरूरत होती है। ऐसे में आप आगे बढ़कर
दोस्त के साथ कॉन्टैक्ट कर लें। अपने दोस्त
के पार्टनर व बच्चों आदि के साथ भी
रिश्ता बढ़ाने की कोशिश करें। इससे
दोस्ती भी बनी रहेगी और मजा भी
ज्यादा आएगा। अगर आपका पार्टनर आपके
दोस्त के साथ रिश्ता न रखना चाहता हो
तो उसे मजबूर न करें। स्वीकार करें कि
उसकी अपनी पसंद – नापसंद है , उसका
अपना दोस्तों का सर्कल है लेकिन अपनी
दोस्ती की अहमियत उसे बताएं और अपने
दम पर रिश्ते को बनाए रखें।
वर्चुअल दोस्ती में बिजी
यह सही है कि आजकल हर कोई बिजी है।
ऐसे में लंबे वक्त तक लोग सोशल नेटवर्किंग
साइट या फोन के जरिए ही दोस्तों के टच
में रहते हैं। अक्सर उन्हें लगता है कि
दोस्ती के लिए हमेशा मिलना – जुलना
जरूरी थोड़े ही है। यह बात काफी हद तक
सही भी है लेकिन पूरी तरह नहीं। आपस में
मिलने – जुलने और पर्सनल टच बनाए रखने से
रिश्ते मजबूत होते हैं। जितना वक्त आप
वर्चुअल दुनिया में देते हैं , अगर उसमें से कुछ
वक्त निकालकर सामने जाकर मिलेंगे तो
दोस्त के साथ का मजा भी लेंगे और रिश्ते
भी मजबूत होंगे। अब यह मिलना – जुलना
बेशक कुछ दिनों या महीने में ही क्यों न हो
, पर ऐसा करना आपके रिश्ते को नई
ताजगी से भर देगा।
नाप – तोल करना
दोस्ती में कभी भी स्वार्थी न बनें। यह न
सोचें कि इस दोस्ती से मुझे फलां फायदा
होगा। इससे आनेवाले वक्त में आपको तो
झटका लगेगा ही , असलियत पता लगने पर
आप एक अच्छा दोस्त भी खो देंगे। दोस्ती
में नाप – तोल न करें। यह न सोचें कि उसने
मेरे लिए जो किया , मैं भी उतना ही करूं।
वह मेरे घर नहीं आया तो मैं ही क्यों जाऊं ?
उसने कॉल नहीं किया तो मैं क्यों करूं ?
दोस्ती आपने इसलिए की कि आपको फलां
शख्स पसंद है तो फिर एक कदम आगे बढ़ाने में
आपको संकोच क्यों ? दोस्त के लिए कुछ
करके आपको भी खुशी मिलेगी और दोस्त को
भी , फिर नाप – तोल क्यों ? इसी तरह
अगर कोई दोस्त आपसे ज्यादा कॉन्टैक्ट
नहीं कर पा रहा तो यह न सोचें कि वह
आपसे दोस्ती नहीं रखना चाहिए , यानी
मन में खुद ही कुछ न गढ़ लें।
Happy Friendship day!