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कब से मनाया जाता है :

राष्ट्रीय मतदाता दिवस की घोषणा मतदाताओं की संख्या मूलत: जो हाल में ही 18 वर्ष की आयु सीमा पूरी की है, को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी।

How to increase voting percentage*   :—-

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क्या है मानसिकता

चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग

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 65 प्रतिशत से थोड़ा कम मतदान भारत जैसे देश के लिए असाधारण नहीं हो सकता। फिर भी ,
राजनीतिक विश्लेषक इसे एक स्वस्थ प्रवृत्ति के रूप में नहीं देखते हैं।मतदान का उच्च प्रतिशत जीवंत लोकतंत्र का प्रतीक माना जाता है। जबकि मतदान का निम्न प्रतिशत राजनीतिक उदासीन समाज की ओर इशारा करता है।ऐसी स्थिति का फायदा विघटनकारी तत्व उठाना चाहते हैं और लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा करना चाहते हैं। इस प्रकार लोकतंत्र को अकेले एक भव्य विचार के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है। यह लगातार मतपत्र में प्रतिबिंबित हो दिखाई पड़ते रहना चाहिए, यही लोकतंत्र की मजबूती है।   [the_ad_placement id=”after-content”]                        

2014 में संपन्न 16 वें आम चुनाव में, मतदान का प्रतिशत अब तक सबसे ज्यादा 66.38 प्रतिशत रहा।
अधिकांश टिप्पणीकारों ने इसके लिए राजनीतिक कारकों को जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन कुछ श्रेय निश्चित रूप से निर्वाचन आयोग के ‘स्वीप’ जागरूकता अभियान को भी दिया जाना चाहिए। इसका आने वाले चुनावों में भी परीक्षण किया जाना निश्चित है। तो अगली बार उच्च मतदान प्रतिशत का श्रेय न सिर्फ राजनीतिक कारकों बल्कि ‘स्वीप’ को भी मिलना चाहिए। इस तरह की व्याख्या अपने आप में जागरूकता अभियान में उत्प्रेरक की तरह कार्य कर सकती है।

इस साल नेशनल वोटर्स डे की थीम ‘Electoral Literacy for Stronger Democracy’ है.

राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर जानिए कुछ जरूरी बातें:

  1. इलेक्शन कमीशन एक व्यक्ति को निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में रजिस्टर करता है. हालांकि एक बार घर का पता बदलने के बाद उसको जानकारी दी जानी चाहिए. लेकिन आपको ये भी पता होना चाहिए कि एक से ज्यादा जगहों पर खुद को वोटर के रूप में रजिस्टर करना कानूनी अपराध है. इसके लिए सजा का भी प्रावधान है.
  2. निर्वाचन आयोग मतदाता को एक फोटो पहचान पत्र प्रदान करता है, जिसे निर्वाचकों का फोटो पहचान पत्र कहते हैं.
  3. कोई भी व्यक्ति मतदान तभी दे सकता है, जब उसका नाम चुनावी लिस्ट में शामिल हो. अगर किसी भी कारण से मतदाता सूची से नाम हटा दिया गया है, तो उसके पास वोटर आईडी होने के बावजूद भी मतदान डालने का अधिकार नहीं होता है.
  4. अगर कोई व्यक्ति दूसरे देश का नागरिक बन जाए, तो वह भारत में वोटिंग के सारे अधिकार खो देता है.